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उपायों का नकारात्मक प्रभाव – Karmalogist Vijay

उपायों का नकारात्मक प्रभाव

मुझे प्रतिदिन अनेकों लोग अपनी समस्याओं के समाधान या आध्यात्मिक ज्ञान एवं आध्यात्मिक उन्नति के लिए संपर्क करते है | उनमे ऐसे भी कई सज्जन और देवियाँ है जो ज्योतिष, रेकी, इत्यादि विज्ञानों की सहायता से लोगो की समस्याओं के लिए उपाय बताते है और कुछ ऐसे भी हैं जो गद्दी लगा कर लोगों की समस्याओं का समाधान उपाय बताकर या स्वयं करते है |

पिछले कई सालों के अनुभव और निजी शोध द्वारा मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूँ कि मार्गदर्शक का कार्य करने वाले लोगों को उपाय बताने के बदले गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है | इनमे मुख्य समस्या उनका स्वास्थ्य या पारिवारिक सुख की कमी है | इसका मुख्य कारण यह है कि मार्गदर्शक के पास आने वाले व्यक्ति को बताये गए उपाय के साथ-साथ मार्गदर्शक स्वयं कोई उपाय नहीं करता | मार्गदर्शक व्यक्ति जिस भी ग्रह या देव का उपाय बताता है वह स्वयं उस ग्रह या देव के लिए कोई उपाय नहीं करता, कभी कभी तो मार्गदर्शक जिस ग्रह या देव के उपाय बताता है उनमे उसकी स्वयं की आस्था ही नहीं होती |

मार्गदर्शक उपाय बताकर बाधा समाप्त करने का यत्न करता है और यह समझता है कि ऐसा करना मेरा व्यवसाय है जिसके बदले मैंने धनराशी ले ली है और जातक की समस्या दूर होने पर मुझे अतिरिक्त लाभ पुण्यकर्म के रूप में भी मिलेगा | यदि ऐसा होता तो उपाय बताने या किसी बाधा पर कार्य करने वालों को तो कभी कोई समस्या ही नहीं होती क्योंकि उनके पुण्यकर्म तो दिन प्रतिदिन बढ़ रहे है | हम सभी जानते है कि संसार कर्मों के लेनदेन से चलता है जब तक लेनदेन समाप्त नहीं होता तब तक आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती | मार्गदर्शक जिस भी ग्रह या देव का उपाय बताता है वह ग्रह या देव उस ग्रसित व्यक्ति को तभी छोड़ेंगे जब उनका हिसाब मार्गदर्शक स्वयं दे |

ऐसा भी कहा जाता है कि ग्रह या देव पूजा अर्चना से प्रसन्न होते है साथ ही यह भी कहा जाता है कि स्वार्थ में की गयी पूजा अर्चना का कोई लाभ नहीं होता, ऐसी पूजा अर्चना करने से तो नहीं करना अच्छा है | ग्रह या देव मार्गदर्शक के संबंधी नहीं हैं ना ही उसके सेवक है कि उसके बताये उपाय को करने से व्यक्ति की बाधा/समस्या भी दूर हो जाये और कर्मफल समाप्त भी हो जाये | कर्मफल को समाप्त करने के लिए समस्या ग्रसित व्यक्ति के साथ साथ मार्गदर्शक अपनी ऊर्जा को कर्मफल समाप्त करने में लगाये तो ही वह उपायों के नकारात्मक प्रभाव से बच सकता है, अधिकतर मार्गदर्शक ऐसा नहीं करते | यहाँ तक कि एक बड़ी संख्या को तो यह भी नहीं मानती क्योंकि उन्हें इस बात का ज्ञान ही नहीं है कि उन पर उपाय बताने से कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ता है जबकि किसी का कार्य पूरा होने पर पुण्यकर्म पर अधिकार समझते है | यदि किसी का सही मार्गदर्शन करने से सकारात्मक प्रभाव है तो कर्मफल मिलने में बाधा बनने पर नकारात्मक प्रभाव भी है |

यदि किसी का सही मार्गदर्शन करने से सकारात्मक प्रभाव है तो कर्मफल मिलने में बाधा बनने पर नकारात्मक प्रभाव भी है | आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो हर कर्म का एक फल होता है और वह फल तब तक समाप्त नहीं होता जब तक उसको पूरा भोगा नहीं जाये | जब कोई व्यक्ति मार्गदर्शक द्वारा बताई गयी विधि, उपाय, दान, पूजा इत्यादि को श्रद्धा से करता है तो उसकी बाधा/समस्या का प्रभाव मार्गदर्शक पर पड़ता है, क्योंकि मार्गदर्शक ने उस व्यक्ति और बाधा की मध्यस्था की है इसलिए उसे भी बाधा का एक भाग अवश्य भोगना पडता है | व्यक्ति का बिना भोगा कर्मफल मार्गदर्शक के हिस्से में आता है जिसके प्रभाव से मार्गदर्शक के जीवन में ऐसी समस्याएं भी आती है जो उसके भाग्य की नहीं होती हालाँकि दूसरे के कर्मफल को भोगने से पुण्यकर्म भी बनता है परन्तु सकारात्मक प्रभाव शीघ्र खर्च होता है | प्रत्येक मार्गदर्शक को स्वयं का इतना ज्ञान तो होता ही है कि वह कितने पानी में है और वह स्वयं कितनी कर्मपूँजी कमाता और खर्च करता है |

मार्गदर्शक जो भी उपाय बताता है उस उपाय का एक भाग उसे स्वयं भी करना चाहिए क्योंकि कर्मफल को भोग कर समाप्त करने की जवाबदेही मार्गदर्शक की होती है | यदि वह ऐसा नहीं करता तो इस जन्म या अगले किसी जन्म में दूसरों के भाग्य के कर्मफल उसके साथ साथ चलते है | ऐसे अनेकों व्यक्तियों से मेरी बात होती है जिनका यह कहना होता है कि उन्होंने अपने जीवन काल में किसी का मन नहीं दुखाया और ना ही ऐसा कोई कर्म किया है जिसका उन्हें ऐसा दंड मिले | पुराने समय में एक गुरु होता था, जिसका कोई स्वार्थ नहीं होता था, जिसकी अपनी कर्मपूंजी इतनी होती थी कि अनेकों गावों का भला करने और कर्मफल को समाप्त करने की शक्ति होती थी | वर्तमान काल के कहे जाने वाले गुरु ना ही कर्मपूंजी पर ध्यान देते है ना ही शक्ति जागृत करने पर ध्यान देते है | मेरा ध्येय किसी की निंदा करना नहीं है, केवल सही मार्गदर्शन करना है |

धन्यवाद 

Karmlaogist Vijay Batra

Founder of ShunyaPanth

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