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Become a Spiritual Life Coach (SLC)

Become a Spiritual Life Coach (SLC) 

Transform and Program your Spiritual life with Karmalogist Vijay Batra

  • Non-religious academic spiritual concepts
  • Inner satisfaction and Self-Spiritual elevation
  • Helping others to correct all incorrect daily karma
  • Achieving more spiritual awakening and upliftment
  • Eliminating orthodox belief system of planetary effects
  • Finishing all types of negative energy and evil thoughts
  • Vision to recognize sin-virtue and right wrong of spirituality
  • Getting rid of worldly sorrows and bring peace and happiness
  • Increasing self-confidence, improving relationships, solving problems
  • Eradicating all confusions of sin-virtue with spiritual answers
  • Becoming Spiritual Life Coach (SLC) and generate extra income

Individual Coaching is provided for deeper knowledge of the same

Karmalogist Vijay Batra is a dynamic Spiritual Life Coach (SLC) for various metaphysical Concepts. He is the inventor of spiritual life coaching and his SLC program will help in your spiritual journey. This is also a great opportunity for healers, readers, therapist, Psychics, astrologers, occultists and other practitioners of the spiritual field to upgrade their spiritual skills and knowledge.

For queries and details Call : +91 – 9811677316

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मंत्रजाप से बढ़ता है गुस्सा ! – Karmalogist Vijay Batra Spiritual Education, Delhi

मंत्रजाप से बढ़ता है गुस्सा !

मान्यता है कि मंत्रजाप अथवा किसी पूजा पाठ करने से मन निर्मल और शांत रहता है इसीलिए अधिकतर लोग अपनी दिनचर्या किसी मंत्रजाप या पूजा पाठ से आरम्भ करते है | यह भी कहा और माना जाता है कि मंत्र पढने से घर में प्रेम और सुख समृद्धि का वास होता है |

प्रतिदिन अनेकों लोग मुझे अपनी समस्याओं के समाधान के लिए व्यक्तिगत रूप से मिलते है जो यह कहते है कि उनके घर में अधिक मंत्रजाप, नाम उच्चारण और पूजा पाठ होता है फिर भी परिवारजनों में गुस्सा है जिससे घर का वातावरण नकारात्मक और अशांति वाला है |

मेरे निजी अनुभव से मंत्रजाप के बाद भी गुस्से और अशांति के दो मुख्य कारण होते है,

  • लक्ष्यहीन मंत्रजाप और पाठ पूजा करना |

  • मंत्रजाप वाले स्थान पर नकारामक शक्ति का प्रभाव होना |

कुछ लोग बिना किसी लक्ष्य के कोई मंत्रजाप अथवा पूजा को सालों तक करते रहते है | इस बात का उन्हें स्वयं भी पता नहीं होता है कि किस मंत्र, नाम या पाठ-पूजा को कितने समय के बाद नहीं करना चाहिए या उसे विराम देना अति आवश्यक है |

सभी लोग यह जानते है कि कोई भी मंत्र, नाम, पाठ इत्यादि उच्चारण करने से ऊर्जा का प्रवाह होता है परन्तु लगभग सभी लोगों को यह ज्ञान नहीं है कि मंत्र, नाम इत्यादि पढने से जो ऊर्जा बनती है उसका सकारात्मक प्रयोग कैसे किया जाता है |

किसी मंत्रजाप से उत्पन्न हुई ऊर्जा का सकारात्मक प्रयोग नहीं कर पाने के कारण ही उसका नकारात्मक प्रभाव मंत्रजाप करने वाले व्यक्ति और उसके घर पर पड़ता है जिसका पहला मुख्य लक्षण गुस्सा आना और अशांति होना है |

मंत्रजाप से पहले लक्ष्य होना और मंत्रजाप से बाद इसकी ऊर्जा का सकारात्मक प्रयोग पता होना अति आवश्यक है अन्यथा मंत्रजाप से किसी बड़ी हानि होने की संभावना भी होती है क्योंकि आवश्यकता से अधिक मंत्रजाप से उत्पन्न ऊर्जा, पारिवारिक सुख से वंचित करने में सक्षम होती है |

इस बात का ज्ञान भी सभी को नहीं है कि नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होने पर बुरी नज़र, टोना टोटका, भूत प्रेत इत्यादि को अधिक बल मिलता है | लोगों को ईश्वर से यह शिकायत भी रहती है कि अधिक मंत्रजाप या पूजा पाठ करके भी नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव समाप्त नहीं होता है |

इस बात पर सभी को विशेष ध्यान देना चाहिए कि दैनिक क्रियाओं में कैसे कर्म करना चाहिए और कैसे कर्म नहीं करना चाहिए | कहीं ऐसा तो नहीं कि मंत्रजाप या पाठ-पूजा के कारण ही समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं |

आध्यात्मिक ज्ञान हेतू संपर्क करें |

Karmalogist Vijay Batra

Founder of ShunyaPanth

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उपायों का फल क्यों नहीं मिलता ? Karmalogist Vijay Batra

उपायों का फल क्यों नहीं मिलता ?

संसार का प्रत्येक व्यक्ति अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अनेकों उपाय करता है परन्तु इनमे अधिकतर उपायों का कोई फल नहीं मिलता जिसके कारण किसी एक समस्या के लिए व्यक्ति बार-बार उपाय करता रहता है | कहा जाता है कि संसार में विश्वास से किया गया कोई भी कर्म निष्फल नहीं जाता, यदि ऐसा है तो फिर उपायों का फल क्यों नहीं मिलता क्योंकि हर उपाय पूरे विश्वास और श्रद्धा से किया जाता है |

अपना मन समझाने के लिए व्यक्ति स्वयं को अनेकों तर्क देता है जैसे इसी में कुछ भलाई होगी, ईश्वर को यही मंज़ूर होगा, अभी समय नहीं आया, इत्यादि | अपने मन को बहलाने से समस्या का समाधान नहीं होता, किसी इच्छित कार्य का पूरा होना समस्या का समाधान है | आइये इसे विस्तार से समझते है कि उपायों का फल क्यों नहीं मिलता |

किसी उपाय का लाभ होना या नहीं होना इस बात पर भी निर्भर करता है कि उपाय बताने वाले व्यक्ति को उपायों का कितना ज्ञान है | यदि उसके उपायों का आधार अपने जीवन काल में सुनी-सुनाई बातें या सस्ती पुस्तकीय जानकारी है तो ऐसे अधिकतर उपायों का लाभ नहीं मिलता है | उपाय का लाभ तभी मिलता है जब व्यक्ति को समस्या का कारण और उपाय के तर्क एवं वास्तविकता का ज्ञान हो |

यदि उपाय का तार्किक ज्ञान हो तो बड़ी से बड़ी समस्या के लिए छोटा सा उपाय भी काफी है | पूर्ण तार्किक ज्ञान होने के लिए किसी गुरु द्वारा दिव्यज्ञान मिलना या अपना निजी शोध होना अति आवश्यक है | हर व्यक्ति अपने आप को गुरु कहलाने के लिए अधिक से अधिक उपायों को तोड़-मरोड़ कर बताते है जिसके परिणाम से साधारण व्यक्ति के कार्य पूरे नहीं होने के साथ-साथ धन और समय हानि भी होती है |

मेरे पास ऐसे अनेकों लोग आते है जो अपने ठगे जाने की कहानियाँ सुनाते है, जिन्होंने अनेकों उपायों को श्रद्धा और विश्वास से किया परन्तु उनकी समस्याएं जस की तस रही | उपायों का फल नहीं मिलने पर अनेकों लोग उपायों और ईश्वर पर विश्वास करना बंद कर देते है | उपायों के सम्पूर्ण ज्ञान नहीं होने पर भी लोग दूसरों को अधिक से अधिक उपाय बता देते है जबकि ऐसे उपायों को करने से अधिकतर लोगो को केवल हानि ही होती है |

यदि आपको कोई भी व्यक्ति ऐसा उपाय बताता है जिसके तर्क का ज्ञान उसे नहीं है या वह व्यक्ति यह नहीं बता सके कि उपाय सकारात्मक परिणाम कैसे देगा तो ऐसे उपायों को बिलकुल भी नहीं करे, नहीं तो समस्या समाप्त होने के स्थान पर आपकी समस्या बढ़ सकती है | पिछले कई सालों में मैंने अनेकों शिष्यों को उपायों का तर्कज्ञान को सिखाया है जो मेरे निजी शोध का सार है | भारत और विदेशों में रहने वाले हजारों लोगो को उपायों के तर्कज्ञान होने से उनका धन और समय की हानि होने से बचाव भी हुआ है |

आपको कौन सा उपाय करना चाहिए और कौन सा उपाय नहीं करना चाहिए इसकी सम्पूर्ण जानकारी के लिए संपर्क करे, इसके अतिरिक्त किसी भी उपाय से सम्बंधित तर्कज्ञान  के लिए भी आप मुझे संपर्क कर सकते है |

Karmalogist Vijay Batra

Founder of ShunyaPanth

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उपायों का नकारात्मक प्रभाव – Karmalogist Vijay

उपायों का नकारात्मक प्रभाव

मुझे प्रतिदिन अनेकों लोग अपनी समस्याओं के समाधान या आध्यात्मिक ज्ञान एवं आध्यात्मिक उन्नति के लिए संपर्क करते है | उनमे ऐसे भी कई सज्जन और देवियाँ है जो ज्योतिष, रेकी, इत्यादि विज्ञानों की सहायता से लोगो की समस्याओं के लिए उपाय बताते है और कुछ ऐसे भी हैं जो गद्दी लगा कर लोगों की समस्याओं का समाधान उपाय बताकर या स्वयं करते है |

पिछले कई सालों के अनुभव और निजी शोध द्वारा मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूँ कि मार्गदर्शक का कार्य करने वाले लोगों को उपाय बताने के बदले गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है | इनमे मुख्य समस्या उनका स्वास्थ्य या पारिवारिक सुख की कमी है | इसका मुख्य कारण यह है कि मार्गदर्शक के पास आने वाले व्यक्ति को बताये गए उपाय के साथ-साथ मार्गदर्शक स्वयं कोई उपाय नहीं करता | मार्गदर्शक व्यक्ति जिस भी ग्रह या देव का उपाय बताता है वह स्वयं उस ग्रह या देव के लिए कोई उपाय नहीं करता, कभी कभी तो मार्गदर्शक जिस ग्रह या देव के उपाय बताता है उनमे उसकी स्वयं की आस्था ही नहीं होती |

मार्गदर्शक उपाय बताकर बाधा समाप्त करने का यत्न करता है और यह समझता है कि ऐसा करना मेरा व्यवसाय है जिसके बदले मैंने धनराशी ले ली है और जातक की समस्या दूर होने पर मुझे अतिरिक्त लाभ पुण्यकर्म के रूप में भी मिलेगा | यदि ऐसा होता तो उपाय बताने या किसी बाधा पर कार्य करने वालों को तो कभी कोई समस्या ही नहीं होती क्योंकि उनके पुण्यकर्म तो दिन प्रतिदिन बढ़ रहे है | हम सभी जानते है कि संसार कर्मों के लेनदेन से चलता है जब तक लेनदेन समाप्त नहीं होता तब तक आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती | मार्गदर्शक जिस भी ग्रह या देव का उपाय बताता है वह ग्रह या देव उस ग्रसित व्यक्ति को तभी छोड़ेंगे जब उनका हिसाब मार्गदर्शक स्वयं दे |

ऐसा भी कहा जाता है कि ग्रह या देव पूजा अर्चना से प्रसन्न होते है साथ ही यह भी कहा जाता है कि स्वार्थ में की गयी पूजा अर्चना का कोई लाभ नहीं होता, ऐसी पूजा अर्चना करने से तो नहीं करना अच्छा है | ग्रह या देव मार्गदर्शक के संबंधी नहीं हैं ना ही उसके सेवक है कि उसके बताये उपाय को करने से व्यक्ति की बाधा/समस्या भी दूर हो जाये और कर्मफल समाप्त भी हो जाये | कर्मफल को समाप्त करने के लिए समस्या ग्रसित व्यक्ति के साथ साथ मार्गदर्शक अपनी ऊर्जा को कर्मफल समाप्त करने में लगाये तो ही वह उपायों के नकारात्मक प्रभाव से बच सकता है, अधिकतर मार्गदर्शक ऐसा नहीं करते | यहाँ तक कि एक बड़ी संख्या को तो यह भी नहीं मानती क्योंकि उन्हें इस बात का ज्ञान ही नहीं है कि उन पर उपाय बताने से कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ता है जबकि किसी का कार्य पूरा होने पर पुण्यकर्म पर अधिकार समझते है | यदि किसी का सही मार्गदर्शन करने से सकारात्मक प्रभाव है तो कर्मफल मिलने में बाधा बनने पर नकारात्मक प्रभाव भी है |

यदि किसी का सही मार्गदर्शन करने से सकारात्मक प्रभाव है तो कर्मफल मिलने में बाधा बनने पर नकारात्मक प्रभाव भी है | आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो हर कर्म का एक फल होता है और वह फल तब तक समाप्त नहीं होता जब तक उसको पूरा भोगा नहीं जाये | जब कोई व्यक्ति मार्गदर्शक द्वारा बताई गयी विधि, उपाय, दान, पूजा इत्यादि को श्रद्धा से करता है तो उसकी बाधा/समस्या का प्रभाव मार्गदर्शक पर पड़ता है, क्योंकि मार्गदर्शक ने उस व्यक्ति और बाधा की मध्यस्था की है इसलिए उसे भी बाधा का एक भाग अवश्य भोगना पडता है | व्यक्ति का बिना भोगा कर्मफल मार्गदर्शक के हिस्से में आता है जिसके प्रभाव से मार्गदर्शक के जीवन में ऐसी समस्याएं भी आती है जो उसके भाग्य की नहीं होती हालाँकि दूसरे के कर्मफल को भोगने से पुण्यकर्म भी बनता है परन्तु सकारात्मक प्रभाव शीघ्र खर्च होता है | प्रत्येक मार्गदर्शक को स्वयं का इतना ज्ञान तो होता ही है कि वह कितने पानी में है और वह स्वयं कितनी कर्मपूँजी कमाता और खर्च करता है |

मार्गदर्शक जो भी उपाय बताता है उस उपाय का एक भाग उसे स्वयं भी करना चाहिए क्योंकि कर्मफल को भोग कर समाप्त करने की जवाबदेही मार्गदर्शक की होती है | यदि वह ऐसा नहीं करता तो इस जन्म या अगले किसी जन्म में दूसरों के भाग्य के कर्मफल उसके साथ साथ चलते है | ऐसे अनेकों व्यक्तियों से मेरी बात होती है जिनका यह कहना होता है कि उन्होंने अपने जीवन काल में किसी का मन नहीं दुखाया और ना ही ऐसा कोई कर्म किया है जिसका उन्हें ऐसा दंड मिले | पुराने समय में एक गुरु होता था, जिसका कोई स्वार्थ नहीं होता था, जिसकी अपनी कर्मपूंजी इतनी होती थी कि अनेकों गावों का भला करने और कर्मफल को समाप्त करने की शक्ति होती थी | वर्तमान काल के कहे जाने वाले गुरु ना ही कर्मपूंजी पर ध्यान देते है ना ही शक्ति जागृत करने पर ध्यान देते है | मेरा ध्येय किसी की निंदा करना नहीं है, केवल सही मार्गदर्शन करना है |

धन्यवाद 

Karmlaogist Vijay Batra

Founder of ShunyaPanth