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मंत्रजाप से बढ़ता है गुस्सा ! – Karmalogist Vijay Batra Spiritual Education, Delhi

Karmalogist Vijay Batra imparting spiritual education about mantra and its negative effects.

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उपायों का फल क्यों नहीं मिलता ? Karmalogist Vijay Batra

उपायों का फल क्यों नहीं मिलता ? Karmalogist Vijay Batra Blog with facts and logics.

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Change Your Destiny Through Karma Education !

To get something different and unique you need to learn different from legendary books. I have been teaching Karma and Spiritual Education since many years, which gives logic based answers to questions that are considered unanswerable. I also assist for spiritual growth and enlightenment.

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गुरु की पहचान – Vijay Batra Karmalogist

गुरु शब्द में बहुत सारी आशा और सकारात्मकता है, ऐसा कहा भी जाता है कि जिसके सिर पर उसके गुरु का हाथ है उसको भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है | गुरु होने पर व्यक्ति को लगता है कि उसके सिर पर ऐसी छत्रछाया है जिसके कारण वह सभी प्रकार की समस्याओं और अनहोनियों से सुरक्षित है, उसके सभी कार्य निर्विघ्न(बिना रूकावट) हो जायेंगे और उसके द्वारा जाने-अनजाने हो गए सभी पापों को गुरु क्षमा करेंगे और उसे बुरे कर्मों के दंड का सामना नहीं करना पड़ेगा | गुरु पर विश्वास करने वाले व्यक्ति की श्रद्धा देवी देवताओं पर होने वाली श्रद्धा से अधिक होती है क्योंकि उसके अंतर्मन में यह निश्चित होता है कि जो कार्य देवी देवता भी नहीं कर सकते वह मेरा गुरु कर सकता है इसका एक कारण यह भी है कि देवी देवता उसके सामने नहीं है जबकि गुरु से वह अपने मन की बात करके अपनी इच्छा या समस्या का समाधान पा सकता है | प्रत्येक व्यक्ति की अपनी श्रद्धा और विश्वास पर निर्भर करता है कि उसके मन में उसके गुरु का क्या स्तर है | जब व्यक्ति की श्रद्धा, विश्वास और उसके गुरु का स्तर तीनो मिल जाते है तो संसार का हर असंभव कार्य बड़ी सरलता से हो जाता है |
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प्रेम स्वार्थ है ! – Vijay Batra Karmalogist

प्रेम शब्द में स्वयं के लिए शक्ति और दूसरे के लिए चिंता है, यह उदासी और तनाव में दवा का काम करता है और सभी प्रकार की समस्याओं और दुविधाओं को भूलने में भी अति लाभकारी है | प्रेम में व्यक्ति को मानसिक सुरक्षा का आभास होता है, ऐसा व्यक्ति मृत है जिसका जीवन प्रेमहीन है क्योंकि प्रेम ही जीवन है | प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी से प्रेम अवश्य करता है और साथ साथ यह भी चाहता है कि उसे कोई निस्वार्थ सच्चा प्रेम करने वाला मिले | हम सभी जानते है कि प्रेम किसी से भी और कहीं भी हो सकता है, जो निस्वार्थ हो, जात-पात, आयु, नियम के अधीन ना हो वही सच्चा प्रेम है | प्रेम को अन्धा और नासमझ कहा जाता है जबकि धर्म में प्रेम का बड़ा महत्त्व है | हम सभी प्रेम के अनेकों रूप देखते है जैसे मातापिता-संतान, गुरु-शिष्य, भाई-बहन, पति-पत्नी, मित्र-संबंधी इत्यादि |
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